12 जुलाई का दिन विशेष
12 July special day in India
12 July
special day in India

12 July special day in India
महत्वपूर्ण दिवस
12 जुलाई का दिन विशेष
12 जुलाई का इतिहास
- 1884: जर्मनी ने कैमरून पर कब्जा किया।
- 1905: लॉर्ड कर्जन ने बंगाल का विभाजन किया।
- 1954: बीबीसी ने पहला टेलीविज़न समाचार बुलेटिन प्रसारित किया।
- 1962: अल्जीरिया को फ़्रांस से स्वतंत्रता मिली।
- 1975: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत से चेचक के उन्मूलन की घोषणा की।
- 1975: केप वर्डे को पुर्तगाल से स्वतंत्रता मिली।
- 1975: आर्थर ऐश विंबलडन एकल लॉन टेनिस टूर्नामेंट जीतने वाले पहले अश्वेत खिलाड़ी बने।
- 2012: लंदन स्थित द शार्ड 310 मीटर (1020 फीट) की ऊंचाई के साथ यूरोप की सबसे ऊंची इमारत बन गयी।
- 2016: नासा का जूनो अंतरिक्ष यान बृहस्पति की कक्षा में प्रवेश किया
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12 जुलाई जन्म, निधन
12 जुलाई का दिन विशेष
दुर्गा प्रसाद खत्री जन्म
दुर्गा प्रसाद खत्री हिंदी साहित्य के चर्चित लेखक और अनुवादक थे। उनका जन्म 11 जुलाई 1895 को हुआ था। उन्होंने हिंदी में कई महत्वपूर्ण कृतियों का लेखन और अनुवाद किया। उनकी रचनाओं में भारतीय समाज और संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है। दुर्गा प्रसाद खत्री ने बच्चों के लिए भी रोचक साहित्य प्रस्तुत किया, जिससे उन्हें नई पीढ़ी में लोकप्रियता मिली।
उनकी भाषा सरल, सहज और प्रभावशाली थी, जो पाठकों को बांधकर रखती थी। हिंदी साहित्य में उनका योगदान आज भी प्रेरणास्रोत माना जाता है और वे अपनी रचनाओं के माध्यम से पाठकों के बीच जीवित हैं।
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संजय मांजरेकर जन्म
संजय मांजरेकर भारतीय क्रिकेट के जाने-माने खिलाड़ी और वर्तमान में प्रसिद्ध कमेंटेटर हैं। उनका जन्म 12 जुलाई 1965 को मंगलौर, कर्नाटक में हुआ था। वे भारतीय टीम के मध्यक्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज रहे और 1980-90 के दशक में कई महत्वपूर्ण पारियां खेलीं।
संजय मांजरेकर ने अपने करियर में टेस्ट और वनडे दोनों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। संन्यास के बाद उन्होंने कमेंट्री में कदम रखा और अपनी विश्लेषणात्मक शैली से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। उनके क्रिकेट ज्ञान और स्पष्ट विचारों के कारण वे आज भी क्रिकेट जगत में सम्मानित माने जाते हैं।
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बिमल रॉय जन्म
बिमल रॉय हिंदी सिनेमा के महान फिल्म निर्देशक और निर्माता थे। उनका जन्म 12 जुलाई 1909 को ढाका (अब बांग्लादेश) में हुआ था। वे अपनी यथार्थवादी फिल्मों के लिए प्रसिद्ध थे, जिनमें सामाजिक मुद्दों को संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया गया।
उनकी चर्चित फिल्मों में दो बीघा जमीन, सुजाता, बंदिनी और मधुमती शामिल हैं। बिमल रॉय ने भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी और फिल्म निर्माण में मानवीय संवेदनाओं को उकेरने में महारत हासिल की।
उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनका निधन 8 जनवरी 1966 को हुआ, लेकिन उनकी फिल्मों की विरासत आज भी जीवित है।
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राजेंद्र कुमार निधन
राजेंद्र कुमार हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता थे जिन्हें ‘जुबिली कुमार’ के नाम से जाना जाता है। उनका जन्म 20 जुलाई 1929 को सियालकोट (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। राजेंद्र कुमार ने 1960 और 70 के दशक में कई हिट फिल्मों में काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में आरती, संगम, धूल का फूल और मेरा नाम जोकर शामिल हैं।
उनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर लंबा समय चलने का रिकॉर्ड बनाया। उनकी अभिनय शैली सरल और दिल को छू लेने वाली थी। राजेंद्र कुमार को कई पुरस्कारों से नवाज़ा गया। उनका निधन 12 जुलाई 1999 को हुआ। वे आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में जीवित हैं।
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दारा सिंह निधन
दारा सिंह भारतीय कुश्ती और सिनेमा के महानायक थे। उनका जन्म 19 नवंबर 1928 को पंजाब के धरमूचक गांव में हुआ था। वे अपने समय के प्रसिद्ध पहलवान रहे और ‘रुस्तम-ए-हिंद’ के नाम से मशहूर हुए। उन्होंने कुश्ती में कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबले जीते और भारत का नाम रोशन किया।
कुश्ती के अलावा दारा सिंह ने हिंदी फिल्मों और टीवी में भी काम किया। रामायण में हनुमान की उनकी भूमिका आज भी लोगों के दिलों में बसी है। वे राज्यसभा सदस्य भी रहे। दारा सिंह का निधन 12 जुलाई 2012 को हुआ, लेकिन वे आज भी लोगों के दिलों में अमर हैं।
12 जुलाई का दिन विशेष
अंतर्राष्ट्रीय आशा दिवस
अंतर्राष्ट्रीय आशा दिवस
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अंतर्राष्ट्रीय आशा दिवस
#InternationalHopeDay #AashaDiwas #StayPositive
अंतर्राष्ट्रीय आशा दिवस हर साल 12 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को यह याद दिलाना है कि चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, आशा की किरण हमेशा मौजूद रहती है। आशा वह शक्ति है जो हमें मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकलने में मदद करती है और नए रास्ते दिखाती है।
यह दिवस समाज में सकारात्मक ऊर्जा और
यह दिवस समाज में सकारात्मक ऊर्जा और विश्वास फैलाने का काम करता है। स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संगठन इस दिन प्रेरणादायक कार्यक्रम, चर्चा और कार्यशालाएँ आयोजित करते हैं। लोग एक-दूसरे को उम्मीद से जुड़े संदेश भेजते हैं और अपने अनुभव साझा करते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय आशा दिवस यह भी सिखाता है कि
अंतर्राष्ट्रीय आशा दिवस यह भी सिखाता है कि जीवन में मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास बनाए रखना कितना जरूरी है। यदि हमारे भीतर उम्मीद जिंदा है तो हम किसी भी समस्या का सामना कर सकते हैं। आशा ही हमें बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित करती है।
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रेत और धूल के तूफानों से निपटने का अंतर्राष्ट्रीय दिवस
रेत और धूल के तूफानों से निपटने का अंतर्राष्ट्रीय दिवस
12 July special day in India
रेत और धूल के तूफानों से निपटने का अंतर्राष्ट्रीय दिवस
#DustStormDay #SandAndDustStorms #EnvironmentAwareness
रेत और धूल के तूफानों से निपटने का अंतर्राष्ट्रीय दिवस हर साल 12 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर में रेत और धूल के तूफानों के कारण होने वाली समस्याओं पर ध्यान आकर्षित करना और उनसे निपटने के उपायों पर जागरूकता बढ़ाना है। रेत और धूल के तूफान न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि मानव स्वास्थ्य, कृषि और आजीविका पर भी बुरा असर डालते हैं।
इन तूफानों से मिट्टी का कटाव बढ़ता है,
इन तूफानों से मिट्टी का कटाव बढ़ता है, फसलें नष्ट होती हैं और हवा में कणीय प्रदूषण बढ़ जाता है, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
इस दिन सरकारें, पर्यावरण संगठन और आम लोग मिलकर जागरूकता अभियान, वृक्षारोपण और टिकाऊ खेती के तरीकों को अपनाने पर जोर देते हैं। रेत और धूल के तूफानों से बचाव के लिए हर किसी का सहयोग जरूरी है ताकि हम एक स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित कर सकें।
12 जुलाई का दिन विशेष
वर्ल्ड पेपर बैग डे
वर्ल्ड पेपर बैग डे
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वर्ल्ड पेपर बैग डे
#WorldPaperBagDay #PlasticFree #EcoFriendly
वर्ल्ड पेपर बैग डे हर साल 12 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य प्लास्टिक के बजाय कागज के थैलों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक करना है। प्लास्टिक बैग्स पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक होते हैं क्योंकि ये आसानी से नष्ट नहीं होते और मिट्टी, जल और जीवों को नुकसान पहुँचाते हैं।
कागज के थैले बायोडिग्रेडेबल होते हैं और
कागज के थैले बायोडिग्रेडेबल होते हैं और इन्हें आसानी से रिसायकल किया जा सकता है। आजकल शॉपिंग मॉल, किराना दुकानें और बाजारों में भी पेपर बैग्स का चलन बढ़ रहा है। वर्ल्ड पेपर बैग डे पर स्कूलों, कॉलेजों और संस्थानों में जागरूकता रैलियाँ, कार्यशालाएँ और पेपर बैग मेकिंग प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि छोटी-छोटी आदतों से बड़ा बदलाव संभव है। आइए, हम सब मिलकर प्लास्टिक का उपयोग कम करें और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें।
12 जुलाई का दिन विशेष | 12 July special day in India