विश्व मृदा दिवस | World Soil Day

विश्व मृदा दिवस
विश्व मृदा दिवस हर वर्ष 5 दिसंबर को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य मृदा (Soil) के संरक्षण, उसकी गुणवत्ता और उसके सतत उपयोग के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। मृदा पृथ्वी पर जीवन की आधारशिला है, क्योंकि भोजन उत्पादन से लेकर पर्यावरणीय संतुलन तक, हर क्षेत्र में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2013 में आधिकारिक रूप से विश्व मृदा दिवस को मान्यता दी थी, जिसके बाद हर वर्ष दुनिया भर में इसे बड़े स्तर पर मनाया जाता है।
विश्व मृदा दिवस
मृदा का महत्व
- मृदा मानव जीवन के लिए बुनियादी संसाधन है।
- विश्व में उत्पन्न होने वाले 95% खाद्य पदार्थ सीधे मृदा पर निर्भर करते हैं।
- मृदा जल चक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह वर्षा जल को धरती में समाहित कर भूजल बढ़ाती है।
- मिट्टी सूक्ष्मजीवों, पोषक तत्वों और जैव विविधता का घर है।
- स्वस्थ मृदा से ही स्वस्थ फसलें और पौधे संभव हो पाते हैं।
विश्व मृदा दिवस
विश्व मृदा दिवस का इतिहास
विश्व मृदा दिवस की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय मृदा विज्ञान संघ (IUSS) के प्रस्ताव के बाद हुई। वर्ष 2002 से इस दिवस को मनाने का विचार रखा गया और बाद में संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता दी। 2013 में संयुक्त राष्ट्र ने आधिकारिक घोषणा करते हुए 5 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस घोषित किया। यह दिन थाईलैंड के महाभिषेक दिवस के साथ भी जुड़ा है, जो मृदा विज्ञान पर विशेष योगदान देने वाले राजा भूमिबोल अदुल्यादेज़ को समर्पित है।
विश्व मृदा दिवस
मृदा क्षरण और बढ़ती चुनौतियाँ
आज दुनिया भर में मृदा की गुणवत्ता तेजी से घट रही है।
- रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग
- कीटनाशकों का दुरुपयोग
- वनों की कटाई
- जल कटाव
- औद्योगिक अपशिष्ट
- जलवायु परिवर्तन
मिलकर मिट्टी को गंभीर नुकसान पहुँचाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि मृदा क्षरण की यही गति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में खाद्य सुरक्षा पर गहरा खतरा पैदा हो जाएगा।
विश्व मृदा दिवस
विश्व मृदा दिवस का उद्देश्य
मृदा संरक्षण के प्रति नागरिकों को जागरूक करना।
सरकारों और वैज्ञानिक संस्थानों को सतत खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करना।
किसानों को मृदा परीक्षण व फसल चक्र अपनाने के लिए समर्थन देना।
युवा पीढ़ी में मिट्टी के महत्व को समझाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करना।
मृदा की गुणवत्ता और जैव विविधता को बनाए रखने की दिशा में नीतियाँ विकसित करना।
विश्व मृदा दिवस
मृदा संरक्षण के उपाय
मिट्टी को सुरक्षित रखने और उसकी उपजाऊ क्षमता बढ़ाने के लिए कुछ प्रमुख कदम उठाए जा सकते हैं:
- फसल चक्र (Crop Rotation): एक ही खेत में अलग-अलग प्रकार की फसलें उगाने से मिट्टी के पोषक तत्व संतुलित रहते हैं।
- जैविक खेती (Organic Farming): रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर प्राकृतिक खाद का उपयोग करें।
- मल्चिंग: खेतों पर पौधों के अवशेष बिछाने से मिट्टी का कटाव रुकता है और नमी बनी रहती है।
- मृदा परीक्षण: मिट्टी की स्थिति समझकर उचित उर्वरक और फसल का चयन किया जा सकता है।
- वनीकरण: पेड़-पौधों की जड़ें मिट्टी को बांधकर कटाव रोकती हैं।
- सिंचाई का वैज्ञानिक तरीका: अत्यधिक सिंचाई से मिट्टी क्षारीय बनती है, इसलिए माइक्रो-इरिगेशन तकनीक अपनानी चाहिए।
विश्व मृदा दिवस
भारत में विश्व मृदा दिवस
भारत एक कृषि प्रधान देश है, इसलिए यहाँ मिट्टी का महत्व और बढ़ जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), कृषि मंत्रालय और कई राज्य सरकारें विश्व मृदा दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करती हैं। किसानों को मुफ्त मृदा जांच, मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरण, कार्यशालाएं और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
विश्व मृदा दिवस | World Soil Day